जहा पर देशभक्ति की बात होती है वहा पर महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह का नाम जरुर आता है । इन्होने ब्रिटिश सरकार से देश की आजादी के लिए काफी सारे आन्दोलन में भाग लिया था । भगत सिंह भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे । 

आइए जानते हैं भगत सिंह के कुछ अनमोल विचार

वो मुझे मार सकते हैं मेरे शरीर को कुचल सकते हैं लेकिन मेरी आशाओं और विचारों को कुचलना उनके बस में नहीं हैं ।
 

प्रेमी, पागल और कवि तीनो एक ही चीज के बने होते हैं ।
 

मैं एक मानव हूं और जो कुछ भी मानव जाति को प्रभावित करता है, मुझे उससे मतलब है ।
 

स्वतंत्र विचार और निष्ठुर आलोचना ये क्रांतिकारी सोच के दो मुख्य लक्षण है ।
 

व्यक्तियों को कुचलकर वे उनके विचारों को नहीं मार सकते ।


राख का हर एक कण मेरे शरीर की गर्मी से गतिमान है, मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है ।

Bhagat Singh

Bhagat Singh
जिंदगी तो अपने ही दम पर जी जाती है, दुसरो के कंधों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं ।


 

देशभक्तों को लोग अक्सर पागल कहा करते हैं ।
 

 

यदि बहरों को सुनाना है तो आवाज को बहुत जोरदार होना होगा, जब हमने बम गिराया तब हमारा ध्येय किसी को मारना नहीं था हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था, अंग्रेजों को भारत छोड़ना होगा ।
 

 

जरूरी नहीं था कि क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं है ।
 

 

सर्वगत भाई चारा तभी हासिल हो सकता है जब सामाजिक व्यक्तिगत राजनीतिक समानताएं हो ।
 
कानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है जब तक कि वो लोगों की अभिव्यक्ति करें ।


लिख रहा हूं आज मैं अंजाम जिसका कल आगाज आयेगा, मेरे लहू का एक-एक कतरा इंकलाब लाएगा ।

Bhagat Singh

 

क्रांति मानव जाति का एक अधिकार है और स्वतंत्रता सभी का एक कभी ना खत्म होने वाला जन्म सिद्ध अधिकार है ।
 

 

मेरा जीवन एक महान लक्ष्य के प्रति समर्पित है वह देश की आजादी दुनिया की अन्य कोई आकर्षित वस्तु मुझे लुभा नहीं सकती ।
 

 

मैं इस बात पर जोर देता हूं कि मैं महत्वकांक्षा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हुं, पर मैं जरूरत पड़ने पर यह सब त्याग सकता हूं, और यही सच्चा बलिदान है ।
 

 

इंसान तभी कुछ करता है जब वह अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है जैसा कि हम विधानसभा में बम फेंकने को लेकर थे ।
 

 

अमूमन लोग जैसी चीजें पहले होती हैं उसी के आदी हो जाते हैं, और बदलाव के विचार को त्याग देते हैं हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रातिकारी भावना में बदलने की जरूरत है ।

दिल से ना निकलेगी मर कर भी वतन की उल्फत मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी ।

BHAGAT SINGH

जो भी व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, रूढ़िवाद पर अविश्वास करना होगा और उसे चुनौती देनी होगी ।
 

सूर्य विश्व भर में हर देश पर उज्जवल होकर गुजरता है, परंतु उस समय ऐसा कोई देश नहीं होगा जो भारत देश के समान स्वतंत्र, खुशहाल और प्यारा हो ।
 

किसी भी व्यक्ति को क्रांति शब्द की शाब्दिक व्याख्या नहीं करनी चाहिए, जो व्यक्ति क्रांति शब्द का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं वे इसे अपने फायदे के हिसाब से अलग अलग अर्थ और अभिप्राय देते हैं ।
 

किसी भी कीमत पर बल का प्रयोग ना करना काल्पनिक आदर्श है और नया आंदोलन जो शुरू हुआ है और जिसके आरंभ की हम चेतावनी दे चुके है वो गुरु गोविंद सिंह, शिवाजी, वाशिंगटन और लेनिन के आदर्शों से प्रेरित है ।
 

अहिंसा को आत्म बल के सिद्धांत का समर्थन प्राप्त है जिसमें अंततः प्रतिद्वंद्वी पर जीत की आशा में कष्ट सहा जाता है लेकिन तब क्या हो जब यह प्रयास अपना लक्ष्य प्राप्त करने में असफल हो जाए , तभी हमें आत्म बल को शारीरिक बल से जोड़ने की जरूरत पड़ती है ताकि हम अत्याचारी और क्रूर दुश्मन के रहमो-करम पर ना निर्भर करे ।

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