Asirgarh Fort

मध्यप्रदेश के Asirgarh Fort के बारे में आपने बहुत ही रोचक और अजीबोगरीब कहानियां सुनी होगी । जिस में सबसे रोचक और महत्वपूर्ण कहानी अश्वत्थामा की है। असीरगढ़ का किला आज भी अपने अंदर बहुत सारे राज समेटे हुए हैं ‌। जिन्होंने महाभारत अच्छी तरह पढ़ा होगा वो अश्वत्थामा को  जानते होंगे अश्वत्थामा महाभारत के प्रमुख चरित्रों में से एक है

कहा जाता है कि अश्वत्थामा आज भी मध्य प्रदेश के असीरगढ़ के किले में बने प्राचीन शिव मंदिर में पूजा करने आता है ‌। महाभारत में पांडवों के द्वारा द्रोणाचार्य को कूटनीति से मार देने से वह बहुत क्रोधित था । इसलिए अश्वत्थामा ने पांडवों के वंश को खत्म करने का निश्चय कर लिया था ।

अश्वत्थामा ने गलती से पांचो पांडवों की जगह द्रोपदी के पांचों पुत्रों को मार दिया था । तब इसके लिए अर्जुन ने अश्वत्थामा को युद्ध के लिए ललकारा तो अश्वत्थामा ने युद्ध में ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया पर ऋषियों के कहने पर अर्जुन ने तो अपना ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया किन्तु अश्वत्थामा ने अपना ब्रह्मास्त्र वापस नहीं लिया और पांडव वंश के विनाश के लिए गर्भ में पल रहे अभिमन्यु के पुत्र पर चला दिया ।

उसके उपरांत श्रीकृष्ण ने उसके माथे पर लगी मणि को छिनकर अश्वत्थामा को सदा सदा के लिए तेजहिन कर दिया और उसे युगो युगो तक भटकने का श्राप दे दिया । मध्यप्रदेश में असीरगढ़ के किले के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि वह आज भी सुबह इस मंदिर में पूजा करने आता है ।

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