KFC (Kentucky Fried Chicken) के founder का नाम तो आप लोग जानते हि होंगे । अगर नहीं जानते तो अब जान जाओगे । उनका नाम कर्नल सैंडर्स है जो आज के समय में अरबपति और KFC Chicken comapny के मालिक है । KFC  जिसकी पूरी दुनिया में काफी शाखाएं हैं । पर इसके पीछे की संघर्ष की कहानी बहुत कम लोगों को पता है ।

कर्नल सैंडर्स का जन्म 9 सितंबर 1890 में अमेरिका में हुआ था । जब उनकी उम्र बहुत कम थी तभी उनके पिता का देहांत हो गया था । बचपन में पिता का साया हट जाने से उनकी जिंदगी में मुश्किलों का आरंभ हो गया था । कर्नल सैंडर्स की मां ने नई शादी कर ली थी उनके सोतेले पिता उनको बहुत पीटा करते थे इसलिए वह बचपन में ही घर छोड़कर भाग गए थे ।

बचपन में ही घर छोड़ देने से उन्हें जिंदगी में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा और आखिरकार 16  साल की उम्र में वह अमेरिकी सेना में भर्ती हो गए । सेना निवृत होने के बाद उन्होंने शादी कर ली और खुशी से जिंदगी बिताने लगे । पर किसी कारण वश नौकरी से निकाले जाने के कारण उनकी पत्नि भी उन्हें छोड़ कर चली गई । आखिर वह फिर से अकेले हो गये । इसके उपरांत उन्होंने कई जगह पर काम किया लेकिन उन्हें किसी भी काम में सफलता नहीं मिली ।  उन्हें चिकन बनाने का बहुत शौक था इसलिए अब उन्होंने एक रेस्तरां खोलने का सोचा
उन्होंने अपने काम कि जगह पर ही 3-4 आदमी बैठ सके ऐसा रेस्तरां खोला और उसी में चिकन के साथ साथ नई डिश बनाने लगे ।

लोगों को उनका बना हुआ चिकन बहुत पसंद आने लगा । इसलिए उन्होंने अब बडा रेस्तरां खोलने की सोची । और उन्होंने ऐसा रेस्तरां खोल दिया जहां एक साथ 172 जन बैठ सके । उनका रेस्तरां काफी अच्छा चलने लगा था । हाईवे निकलने के कारण उनको रेस्तरां बंद करना पड़ा और अंततः वो काफी कर्जे में डुब गये थे । उन्होंने रेस्तरां बेचकर लोगों का कर्ज चुका दिया ।

अब कर्नल सैंडर्स का चलता हुआ बिज़नस बंद हो गया था। इस वक्त उनकी उम्र 65 हो चुकी थी । अब उनके पास जीवन यापन के लिए कोई पूंजी नहीं बची थी | कर्नल मसाले और प्रेसर कुकर लेकर अपनी चिकन बनाने का प्रयोग की मार्केटिंग करने निकल पड़े। उन्होंने अलग-अलग  प्रांतों में जाकर रेस्टोरेंट के मालिक से मिलना और बात करना शुरू किया । समय फिर भी उनके साथ नहीं था । एक-एक करके सभी रेस्टोरेंट के मालिकों ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया । फिर भी वह लगातार अपने कार्य में लगे रहे और कोशिश करते रहे । उन्हें 1008 रेस्टोरेंट के मालिकों ने रिजेक्ट कर दिया फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी । आखिरकार 1009 वे रेस्टोरेंट के मालिक ने उन्हें हां कहा |आखिर उन्हें उनकी पहली हां मिल ही गई।

उनके चिकन से रेस्तरां में लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हुई और इस तरह उनका बिजनेस वापस चलने लगा था । सोचो 65 की उम्र में, जब लोग रिटायर हो जाते हैं, एक इस उम्र में जब लोग दुबारा उठने से हार मान लेते हैं। उस उम्र में उन्होंने अपनी मेहनत के बलबूते पर एक ऐसा बिज़नस खड़ा किया , जिसकी आज कई देशों में शाखाएं हैं । आज के समय में 120 से अधिक देशों में उनकी शाखाएं हैं

इससे यह स्पष्ट होता है कि आदमी अगर कोई काम करने का निश्चय कर लें तो उसकी उम्र कोई मायने नहीं रखती है.


Note :- हमारे द्वारा दी गयी जानकारी मैं आपको कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट करे हम इसे अपडेट करते रहेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here